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कोरबा जिले की महिलाएं बना रही साग सब्जियों से हर्बल गुलाल, स्वयं को बना रही है आर्थिक सुदृढ़

कोरबा (कोरबा वाणी)- – होली के मद्देनजर कोरबा जिले की पोड़ी उपरोड़ा में बुका फॉर्मर प्रोड्यूसर आर्गेनाईजेशन से जुडी महिला स्वसहायता समूहों की महिलाओं द्वारा चुकंदर, पालक, हल्दी जैसे सब्जियों का उपयोग करके हर्बल गुलाल बनाया जा रहा हैं जो मानव त्वचा खासकर बच्चों के लिए सुरक्षित है. इस पर्यावरण-अनुकूल उत्पाद को महिलाएं अरारोट पाउडर से गुलाल का बेस तैयार कर उसमे पालक, चुकंदर और हल्दी का घोल मिलाकर बनाती है. खास बात यह है की खुशबु के लिए हर्बल ग़ुलाल में केवड़ा, सफ़ेद गुलाब, पाइनएप्पल और स्ट्राबेरी के फ्लैवर मिलाए जा रहे हैँ जो खाद्य पदार्थों में उपयोग किये जाने वाले उत्पाद है. हर्बल ग़ुलाल के निर्माण से होली तो खुशनुमा होंगी ही बाजार में इस हर्बल गुलाब की बिक्री से महिला स्व सहायता समूह की ये महिलाएं भी आर्थिक रूप से सुदृढ होंगी.

दरअसल रंगों का त्यौहार होली अब महज 20 दिन दूर है. ऐसे में हर कोई रंगों में सराबोर होने के लिए बेताब हैं. लेकिन इस बेताबी में रंगों के रासायनिक दुष्प्रभाव से अपनी त्वचा को बचाने की फ़िक्रमंदी भी है. लेकिन कोरबा जिले की पोड़ी उपरोड़ा ब्लॉक की बिहान योजना से जुडी महिला स्व सहायता समूह की महिलाओं द्वारा इस समस्या से निजात दिलाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है. बिहान योजना के तहत बुका फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन से जुडी 30 महिलाओं द्वारा पालक, चुकंदर और हल्दी से अलग अलग रंग के प्राकृतिक और हर्बल गुलाल बनाये जा रहे हैं जो पर्यावरण के अनुकूल तो हैं ही मानव त्वचा खासकर बच्चों के लिए सुरक्षित हैं. महिलाएं पहले बाजार से ताजा पालक, चुकंदर और हल्दी लेकर उसे साफ कर मिक्सी में पिसती हैं. फिर गुलाल का बेस बनाने के लिए अरारोट का इस्तेमाल कर उसमें पीसे गए पालक, चुकंदर और हल्दी के घोल मिलाकर सुखाती हैँ. अंत में खुशबू के लिए उम्दा और प्योर ऐसेंस का उपयोग कर उन्हें अलग अलग फ्लेवर दिया जा रहा है. जिसमें बड़ों के लिए केसर, रोज जैसी खुशबू है तो बच्चों के लिए स्ट्रॉबेरी, पाइनएपल, मैंगो जैसी खुशबू तैयार है। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान महिलाओं द्वारा हाइजीन का खास ख्याल रखा जाता है जिसके लिए महिलाएं हाथ में ग्लव्स और सिर में हेयर नेट (जालीदार टोपी) का इस्तेमाल करती है.

तेजी से बदलते बाजार में मानव त्वचा की सुरक्षा और भरोसे की गारंटी के साथ निर्मित इस हर्बल ग़ुलाल की डिमांड खूब हो रही है. बुका फॉर्मर प्रोड्यूसर आर्गेनाईजेशन की अध्यक्ष पूजा सिंह ने बताया की उन्होंने 20 टन हर्बल ग़ुलाल बनाने का लक्ष्य रखा है, अभी तक उन्हें 6 क्विंटल का आर्डर मिल भी चूका है. पूजा सिंह का कहना है कि हर्बल गुलाल के निर्माण से महिलाएं आर्थिक रूप से सुदृढ़ भी होगी उन्हें आशा है कि महिला समूह को 25 से 30 प्रतिशत तक का लाभ होगा.

जय बिहान का नारा बुलंद करने वाली इन संगठित महिला समूहों के कौशल विकास और उसके जरिए उन्हें आर्थिक संपन्नता एवं सामाजिक मजबूती देने का काम राष्ट्रीय आजीविका मिशन द्वारा किया जा रहा है. जिनके जिला मिशन प्रबंधक अनुराग जैन का कहना है की पालक, चुकंदर और हल्दी जैसे विशुद्ध खाद्य सामग्रियों से बनाए गए हर्बल गुलाल की बड़ी श्रृंखला में पहली बार बच्चों की पसंद का ध्यान रखा गया है। इस हर्बल गुलाल का दाम भी बाजार में उपलब्ध अन्य ब्रांडों के गुलालों से कम रखा गया है। यही वजह है कि इनके उत्पाद की बाजार में जबरदस्त मांग है.

कोरबा जिले की स्व सहायता समूह की महिलाओं द्वारा हर्बल ग़ुलाल निर्माण के प्रयास को जिला कलेक्टर कुणाल दुदावत ने महिला सशक्ति करण की दिशा में एक ठोस कदम बताते हुवे जिले वासियों से अपील की है कि आगे आने वाली इन महिलाओं के प्रयासों को सराहें और इको फ्रेंडली रंगों का इस्तेमाल करे।

अब तक घर में चूल्हा और चौका बर्तन संभालकर भी पैसों के लिए पतियों पर आश्रित इन महिलाओं को हर्बल ग़ुलाल बनाने के गुर ने ना केवल आत्मविश्वास से भर दिया है बल्कि सामूहिक प्रयासो ने आर्थिक मजबूती से आत्मनिर्भर बना दिया है. ये महिलाएं अब उन अन्य महिलाओं के लिए भी मिसाल बन रही हैं जो घर गृहस्थी के साथ समूहों के जरिए अपनी पारिवारिक स्थिति मजबूत करने की चाह रखती हैं।