कोरबा न्यूज़जुर्म

स्कैमरों ने तीन दिन तक डिजिटल अरेस्ट करके रखा डॉक्टर और उसकी पत्नी को, 40 लख रुपए को आरटीजीएस करने का बनाया दबाव

कोरबा (कोरबा वाणी)- तेजी से आगे बढ़ती डिजिटल दुनिया में, साइबर स्कैम हाइटेक होते जा रहे हैं, जिनमें से सबसे खतरनाक स्कैम डिजिटल अरेस्ट है. सामान्य साइबर धोखाधड़ी से अलग, डिजिटल अरेस्ट स्कैम में अपराधी, फर्ज़ी कानून प्रवर्तन अधिकारी बनकर विक्टिम को धन ट्रांसफर करने या संवेदनशील जानकारी साझा करने के लिए धमकाते हैं. इस स्कैम में फंसा पीड़ित भी डर के अपने को बचाने के लिए अपनी जमा पूंजी स्कैमर के खाते में ट्रांसफर कर जाता है.

ऐसा ही एक मामला कोरबा जिले से सामने आया है जहां स्कैमरों द्वारा अपने आप को क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताते हुए एक आयुर्वेद डॉक्टर को झूठे केस का डर दिखाकर तीन दिनों तक डिजिटल अरेस्ट किया गया. इस दौरान पीड़ित डॉक्टर को उसके बैंक में रखे जमा पुंजी 40 लाख रूपये को RTGS करने का दबाव बनाया गया. तीन दिनों तक स्कैमरों का दबाव झेल रहे डॉक्टर ने आखिरकार अपने दोस्त को फोन लगाया, जो से लेकर साइबर थाने पहुंचा जहां पीड़ित डॉक्टर ने अपने साथ हुए स्कैम की जानकारी देते हुए साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई.

घटनाक्रम के अनुसार 10 जुलाई को दोपहर 3 बजे पेशे से आयुर्वेद डॉक्टर गौतम प्रसाद नेताम के पास एक अनजान नंबर से एक महिला का फोन आया जिन्होंने डॉक्टर नेताम से कहा की आपके आधार नंबर से दो सिम इशू है और दूसरे सिम के नंबर से आप या आपके सिम के धारक द्वारा दूसरे लोगों से अश्लील बाते कर अश्लील वीडियो कंटेंट भेजा गया है. इसके खिलाफ आपके नाम से अरेस्ट वारंट जारी किया गया है. इतना कहकर महिला ने एक पुरुष को क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर पीड़ित डॉक्टर की बात कराई जिन्होंने वीडियो कॉल के जरिए डॉक्टर नेताम को डराया और मनी लांड्रिंग केस में फंसे नरेश गोयल की गिरफ्तारी का फोटो दिखाते हुए डॉक्टर और उसकी पत्नी पर बिना परमिशन के कहीं आने जाने पर पाबंदी लगाते तीन दिनों तक डिजिटल अरेस्ट करके रखा.

इस दौरान लगातार डॉक्टर को जेल जाने की धमकी दिया जाते रहा. डॉक्टर पति के जेल जाने की बातें सुन सुनकर पीड़ित डॉक्टर की पत्नी जो स्वयं रिटायर्ड प्रिंसिपल है वह बीमार पड़ गई. इस दौरान स्कैमरो ने पीड़ित डॉक्टर से उसके बैंक अकाउंट की समस्त जानकारी लेकर उनकी समस्त जमा पूंजी को बैंक से निकाल कर कैश लेकर आने को कहा. जब कैश लाने की बात को डॉक्टर ने सिरे से नकार दिया तब स्कैमर ने RTGS करने को कहा.

जिसके बाद डॉक्टर को शक हुआ और उसने अपने दोस्त को फोन लगाया और अपनी आपबीती सुनाया. जागरूक दोस्त ने पीड़ित डॉक्टर को तुरंत साइबर में शिकायत करने की सलाह दी और अपने साथ पीड़ित डॉक्टर को लेकर साइबर सेल पहुंचा.

साइबर सेल पहुंचकर पीड़ित ने अपने साथ हुए समस्त आपबीती साइबर प्रभारी ललित चंद्रा को सुनाया जिन्होंने तुरंत बैंक जाकर पीड़ित डॉक्टर के अकाउंट को फ्रिज कराया और पीड़ित डॉक्टर को स्कैमर के नंबर को ब्लॉक करने का सलाह देते हुए मामले को संज्ञान में लिया.

इस मामले में भले ही डॉक्टर नेताम तीन दिनों तक परेशान रहे लेकिन अंत में उन्होंने सूझबूझ दिखा और अपनी जमा पूंजी बचा ली. लेकिन आप को भी ये स्कैमर अपनी झांसे में लेने के लिए नकली क्राइम ब्रांच अधिकारी बनकर फोन कर सकते हैं. ऐसे अननोन नंबर से फोन आने पर आप डरे नहीं क्योंकि कोई भी सरकारी एजेंसी या पुलिस विभाग फोन या वीडियो कॉल पर कभी किसी को गिरफ्तार नहीं करती। यदि ऐसी कोई कॉल आए, तो घबराएं नहीं और तुरंत वीडियो कॉल काट दें। किसी भी अनजान व्यक्ति को अपनी निजी जानकारी या बैंक खाते का विवरण न दें। यदि आप किसी साइबर धोखाधड़ी के शिकार होते हैं, तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या साइबरक्राइम की आधिकारिक वेबसाइट पर शिकायत दर्ज कराएं.